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श्लोक 6.122.16  |
किष्किन्धां प्रति याह्याशु स्वसैन्येनाभिसंवृत:।
स्वराज्ये वस लङ्कायां मया दत्ते विभीषण।
न त्वां धर्षयितुं शक्ता: सेन्द्रा अपि दिवौकस:॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| 'वानरराज! अब तुम अपनी सेना सहित किष्किन्धपुरी जाओ। विभीषण! तुम भी मेरे द्वारा दिए गए राज्य में लंका में रहो; अब इन्द्र आदि देवता भी तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।॥16॥ |
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| ‘Monkey King! Now you should go to Kishkindapuri with your army. Vibhishan! You should also stay in Lanka in the kingdom given to you by me; now even Indra and other gods cannot harm you.॥ 16॥ |
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