श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.122.16 
किष्किन्धां प्रति याह्याशु स्वसैन्येनाभिसंवृत:।
स्वराज्ये वस लङ्कायां मया दत्ते विभीषण।
न त्वां धर्षयितुं शक्ता: सेन्द्रा अपि दिवौकस:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'वानरराज! अब तुम अपनी सेना सहित किष्किन्धपुरी जाओ। विभीषण! तुम भी मेरे द्वारा दिए गए राज्य में लंका में रहो; अब इन्द्र आदि देवता भी तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।॥16॥
 
‘Monkey King! Now you should go to Kishkindapuri with your army. Vibhishan! You should also stay in Lanka in the kingdom given to you by me; now even Indra and other gods cannot harm you.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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