vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना
»
श्लोक 15
श्लोक
6.122.15
यत् तु कार्यं वयस्येन स्निग्धेन च हितेन च।
कृतं सुग्रीव तत् सर्वं भवताधर्मभीरुणा॥ १५॥
अनुवाद
हे मित्र सुग्रीव! तुमने वह सब कार्य किया है जो एक शुभचिंतक और प्रिय मित्र को करना चाहिए; क्योंकि तुम अनिष्ट से डरते हो॥15॥
Friend Sugreeva! You have done all the work that a well-wisher and loving friend should do; because you are afraid of evil.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×