श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 121: श्रीराम का अयोध्या जाने के लिये उद्यत होना और उनकी आज्ञा से विभीषण का पुष्पक विमान को मँगाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.121.7 
एतत् पश्य यथा क्षिप्रं प्रतिगच्छाम तां पुरीम्।
अयोध्यां गच्छतो ह्येष पन्था: परमदुर्गम:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अब आप इस बात पर ध्यान दीजिए कि हम लोग शीघ्रातिशीघ्र अयोध्यापुरी कैसे लौट सकें; क्योंकि वहाँ पैदल जाने वाले मनुष्य के लिए यह मार्ग अत्यन्त कठिन है।॥7॥
 
‘Now you should focus on how we can return to Ayodhyapuri as quickly as possible; because this route is very difficult for a person travelling there on foot.'॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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