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श्लोक 6.121.7  |
एतत् पश्य यथा क्षिप्रं प्रतिगच्छाम तां पुरीम्।
अयोध्यां गच्छतो ह्येष पन्था: परमदुर्गम:॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| अब आप इस बात पर ध्यान दीजिए कि हम लोग शीघ्रातिशीघ्र अयोध्यापुरी कैसे लौट सकें; क्योंकि वहाँ पैदल जाने वाले मनुष्य के लिए यह मार्ग अत्यन्त कठिन है।॥7॥ |
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| ‘Now you should focus on how we can return to Ayodhyapuri as quickly as possible; because this route is very difficult for a person travelling there on foot.'॥ 7॥ |
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