श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 121: श्रीराम का अयोध्या जाने के लिये उद्यत होना और उनकी आज्ञा से विभीषण का पुष्पक विमान को मँगाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.121.28 
तलै: स्फटिकचित्राङ्गैर्वैदूर्यैश्च वरासनै:।
महार्हास्तरणोपेतैरुपपन्नं महाधनै:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उसका फर्श विचित्र स्फटिकों से जड़ा हुआ था। वहाँ नीलमणि के बने हुए बहुमूल्य सिंहासन थे जिन पर अत्यंत मूल्यवान पलंग बिछे हुए थे॥28॥
 
Its floor was studded with strange crystals. There were precious thrones made of sapphire on which were spread extremely valuable beds.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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