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ramayan 6.121.24: उस विमान का एक-एक भाग सोने से जड़ा हुआ था, जिससे वह अत्यंत सुंदर लग रहा था। उसके भीतर नीलम मणि से बनी वेदियाँ थीं, जगह-जगह गुप्त कक्ष बने हुए थे और वह चारों ओर से चाँदी के समान चमक रहा था।   |   ramayan सर्ग 6.121: श्रीराम का अयोध्या जाने के लिये उद्यत होना और उनकी आज्ञा से विभीषण का पुष्पक विमान को मँगाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 121: श्रीराम का अयोध्या जाने के लिये उद्यत होना और उनकी आज्ञा से विभीषण का पुष्पक विमान को मँगाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.121.24 
तत: काञ्चनचित्राङ्गं वैदूर्यमणिवेदिकम्।
कूटागारै: परिक्षिप्तं सर्वतो रजतप्रभम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उस विमान का एक-एक भाग सोने से जड़ा हुआ था, जिससे वह अत्यंत सुंदर लग रहा था। उसके भीतर नीलम मणि से बनी वेदियाँ थीं, जगह-जगह गुप्त कक्ष बने हुए थे और वह चारों ओर से चाँदी के समान चमक रहा था।
 
Each and every part of that plane was studded with gold, which made it look very beautiful. Inside it were altars made of sapphire gem, secret rooms were built here and there and it was shining like silver on all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)