श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 121: श्रीराम का अयोध्या जाने के लिये उद्यत होना और उनकी आज्ञा से विभीषण का पुष्पक विमान को मँगाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.121.20 
कौसल्यां च सुमित्रां च कैकेयीं च यशस्विनीम्।
गुहं च सुहृदं चैव पौराञ्जानपदै: सह॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'उनके अतिरिक्त मैं माता कौशल्या, सुमित्रा, महाप्रतापी कैकेयी, प्रिय सखा गुह तथा नगर एवं जनपद के लोगों से मिलने के लिए भी बहुत उत्सुक हूँ।
 
‘Apart from them I am also very eager to see mother Kausalya, Sumitra, illustrious Kaikeyi, dear friend Guha and the people of the city and the district.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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