vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 121: श्रीराम का अयोध्या जाने के लिये उद्यत होना और उनकी आज्ञा से विभीषण का पुष्पक विमान को मँगाना
»
श्लोक 2
श्लोक
6.121.2
स्नानानि चाङ्गरागाणि वस्त्राण्याभरणानि च।
चन्दनानि च माल्यानि दिव्यानि विविधानि च॥ २॥
अनुवाद
रघुनन्दन! स्नान के लिए जल, सुगंध, वस्त्र, आभूषण, चंदन और नाना प्रकार की दिव्य मालाएँ आपकी सेवा में उपस्थित हैं॥ 2॥
Raghunandan! Water for bathing, perfume, clothes, ornaments, sandalwood and various types of divine garlands are present at your service.॥ 2॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd