प्रणयाद् बहुमानाच्च सौहार्देन च राघव।
प्रसादयामि प्रेष्योऽहं न खल्वाज्ञापयामि ते॥ १५॥
अनुवाद
‘रघुवीर! मैं आपसे केवल प्रेम, आदर और सौहार्द के कारण यह प्रार्थना कर रहा हूँ। मैं आपको प्रसन्न करना चाहता हूँ। मैं आपका सेवक हूँ। इसीलिए आपसे प्रार्थना कर रहा हूँ, आपको आदेश नहीं दे रहा हूँ।’॥15॥
‘Raghuveer! I am making this request to you only out of love, respect and cordiality. I want to please you. I am your servant. That is why I request you, I am not ordering you.’॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥