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ramayan 6.120.3: जब महात्मा इन्द्र ने प्रसन्नतापूर्वक ऐसा कहा, तब श्री रघुनाथजी को बड़ा आनन्द हुआ। वे हर्षित होकर बोले-॥3॥   |   ramayan सर्ग 6.120: श्रीराम के अनुरोध से इन्द्र का मरे हुए वानरों को जीवित करना, देवताओं का प्रस्थान और वानर सेना का विश्राम   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.120.3 
एवमुक्तो महेन्द्रेण प्रसन्नेन महात्मना।
सुप्रसन्नमना हृष्टो वचनं प्राह राघव:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जब महात्मा इन्द्र ने प्रसन्नतापूर्वक ऐसा कहा, तब श्री रघुनाथजी को बड़ा आनन्द हुआ। वे हर्षित होकर बोले-॥3॥
 
When Mahatma Indra said this happily, Shri Raghunath felt very happy. He said with joy -॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)