Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.12.9: जैसे चन्द्रमा, ग्रह, नक्षत्र और मरुतगणों से घिरा हुआ इन्द्र स्वर्ग की सम्पत्ति का उपभोग करता है, वैसे ही आप सभी से घिरा हुआ मैं भी लंका की प्रचुर राजसी सम्पत्ति का उपभोग करूँ - यही मेरी इच्छा है॥ 9॥   |   ramayan सर्ग 6.12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.12.9 
ससोमग्रहनक्षत्रैर्मरुद्भिरिव वासव:।
भवद्भिरहमत्यर्थं वृत: श्रियमवाप्नुयाम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जैसे चन्द्रमा, ग्रह, नक्षत्र और मरुतगणों से घिरा हुआ इन्द्र स्वर्ग की सम्पत्ति का उपभोग करता है, वैसे ही आप सभी से घिरा हुआ मैं भी लंका की प्रचुर राजसी सम्पत्ति का उपभोग करूँ - यही मेरी इच्छा है॥ 9॥
 
Just as Indra, surrounded by the moon, planets, stars and the Maruts, enjoys the wealth of heaven, similarly, surrounded by you all, I too should enjoy the abundant royal wealth of Lanka - this is my desire.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)