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ramayan 6.12.7: एकत्रित हो जाइए! जब धर्म, धन और काम से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो आप यह विचार करने में सक्षम होते हैं कि क्या प्रिय है और क्या अप्रिय, सुख और दुःख, लाभ और हानि और कल्याण।   |   ramayan सर्ग 6.12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.12.7 
प्रियाप्रिये सुखे दु:खे लाभालाभे हिताहिते।
धर्मकामार्थकृच्छ्रेषु यूयमर्हथ वेदितुम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
एकत्रित हो जाइए! जब धर्म, धन और काम से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो आप यह विचार करने में सक्षम होते हैं कि क्या प्रिय है और क्या अप्रिय, सुख और दुःख, लाभ और हानि और कल्याण।
 
Congregate! When faced with problems related to religion, money and work, you are capable of considering what is loved and what is unpleasant, happiness and sorrow, profit and loss and welfare.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)