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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.12.5 
विहितं बहिरन्तश्च बलं बलवतस्तव।
कुरुष्वाविमना: क्षिप्रं यदभिप्रेतमस्ति ते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
दैत्यराज! मैंने आपके पराक्रमी राजा की सेना को नगर के भीतर और बाहर उचित स्थानों पर तैनात कर दिया है। अब आप शीघ्र ही स्वस्थ होकर अपना इच्छित कार्य पूरा करें।॥5॥
 
‘King of demons! I have deployed the army of your mighty king at the appropriate places inside and outside the city. Now you should regain your health and complete your desired task soon.'॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)