श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.12.36 
अहमुत्सादयिष्यामि शत्रूंस्तव निशाचर।
यदि शक्रविवस्वन्तौ यदि पावकमारुतौ।
तावहं योधयिष्यामि कुबेरवरुणावपि॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
निश्चर! यदि तुम्हारे शत्रु इन्द्र, सूर्य, अग्नि, वायु, कुबेर और वरुण भी हों, तो भी मैं उनसे युद्ध करके तुम्हारे समस्त शत्रुओं का नाश कर दूँगा॥ 36॥
 
Nishchar! Even if your enemies are Indra, Surya, Agni, Vayu, Kubera and Varuna, I will fight with them and uproot all your enemies.॥ 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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