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ramayan 6.12.30: दशानन! जो राजा अपने सभी राज-काज न्यायपूर्वक करता है, उसे बाद में पछताना नहीं पड़ता, क्योंकि उसकी बुद्धि दृढ़ संकल्प से परिपूर्ण होती है।   |   ramayan सर्ग 6.12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.12.30 
न्यायेन राजकार्याणि य: करोति दशानन।
न स संतप्यते पश्चान्निश्चितार्थमतिर्नृप:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
दशानन! जो राजा अपने सभी राज-काज न्यायपूर्वक करता है, उसे बाद में पछताना नहीं पड़ता, क्योंकि उसकी बुद्धि दृढ़ संकल्प से परिपूर्ण होती है।
 
Dashanana! A king who carries out all his royal duties with justice does not have to repent later because his wisdom is full of determination.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)