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ramayan 6.12.3: प्रहस्त ने अपने मन को वश में करके राजा की आज्ञा का पालन करने की इच्छा से पूरी सेना को नगर के अन्दर और बाहर उचित स्थानों पर तैनात कर दिया।   |   ramayan सर्ग 6.12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.12.3 
स प्रहस्त: प्रणीतात्मा चिकीर्षन् राजशासनम्।
विनिक्षिपद् बलं सर्वं बहिरन्तश्च मन्दिरे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
प्रहस्त ने अपने मन को वश में करके राजा की आज्ञा का पालन करने की इच्छा से पूरी सेना को नगर के अन्दर और बाहर उचित स्थानों पर तैनात कर दिया।
 
Prahasta, having controlled his mind, with a desire to obey the king's orders, deployed the entire army at appropriate places inside and outside the city.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)