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ramayan 6.12.29: 'महाराज! आपने जो कुछ भी दूसरे की पत्नी का अपहरण करके किया है, वह आपके लिए बहुत अनुचित है। इस पाप कर्म को करने से पहले आपको हमसे परामर्श अवश्य लेना चाहिए था।'   |   ramayan सर्ग 6.12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.12.29 
सर्वमेतन्महाराज कृतमप्रतिमं तव।
विधीयेत सहास्माभिरादावेवास्य कर्मण:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'महाराज! आपने जो कुछ भी दूसरे की पत्नी का अपहरण करके किया है, वह आपके लिए बहुत अनुचित है। इस पाप कर्म को करने से पहले आपको हमसे परामर्श अवश्य लेना चाहिए था।'
 
‘Maharaj! Whatever you have done by stealthily kidnapping another man's wife, it is very inappropriate for you. You should have consulted us before committing this sinful act.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)