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ramayan 6.12.27: कामातुर रावण की दुःखपूर्ण प्रलाप सुनकर कुम्भकर्ण क्रोधित होकर इस प्रकार बोला:-॥27॥   |   ramayan सर्ग 6.12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.12.27 
तस्य कामपरीतस्य निशम्य परिदेवितम्।
कुम्भकर्ण: प्रचुक्रोध वचनं चेदमब्रवीत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कामातुर रावण की दुःखपूर्ण प्रलाप सुनकर कुम्भकर्ण क्रोधित होकर इस प्रकार बोला:-॥27॥
 
Hearing the sorrowful ravings of the lustful Ravana, Kumbhakarna became angry and said thus:-॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)