| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना » श्लोक 23-24 |
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| | | | श्लोक 6.12.23-24  | तदा देवासुरे युद्धे युष्माभि: सहितोऽजयम्।
ते मे भवन्तश्च तथा सुग्रीवप्रमुखान् हरीन्॥ २३॥
परे पारे समुद्रस्य पुरस्कृत्य नृपात्मजौ।
सीताया: पदवीं प्राप्य सम्प्राप्तौ वरुणालयम्॥ २४॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘उन दिनों जब देवताओं और दानवों में युद्ध हो रहा था, तब तुम सबकी सहायता से मैंने उसे जीता था। आज भी तुम लोग उसी प्रकार मेरी सहायता कर रहे हो। सीता की सूचना पाकर वे दोनों राजकुमार सुग्रीव आदि वानरों के साथ समुद्र के दूसरे तट पर पहुँच गए हैं।॥ 23-24॥ | | | | ‘In those days when the war between the gods and the demons was going on, I had won it with the help of all of you. Even today you are helping me in the same way. After getting the information about Sita, those two princes have reached the other shore of the ocean along with Sugreeva and other monkeys.॥ 23-24॥ | | ✨ ai-generated | | |
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