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ramayan 6.12.21-22: 'अथवा एक भी बंदर आकर हमारे बीच बहुत बड़ा विनाश कर गया था। इसलिए इस कार्य की सिद्धि का उपाय समझना बहुत कठिन है। इसलिए जो अपनी बुद्धि के अनुसार इसे उचित समझे, वह बताए। आप सभी अपने-अपने विचार अवश्य व्यक्त करें। यद्यपि हमें मनुष्यों का कोई भय नहीं है, फिर भी आप विजय के उपाय पर विचार करें।' 21-22   |   ramayan सर्ग 6.12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  6.12.21-22 
अथवा कपिनैकेन कृतं न: कदनं महत्॥ २१॥
दुर्ज्ञेया: कार्यगतयो ब्रूत यस्य यथामति।
मानुषान्नो भयं नास्ति तथापि तु विमृश्यताम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'अथवा एक भी बंदर आकर हमारे बीच बहुत बड़ा विनाश कर गया था। इसलिए इस कार्य की सिद्धि का उपाय समझना बहुत कठिन है। इसलिए जो अपनी बुद्धि के अनुसार इसे उचित समझे, वह बताए। आप सभी अपने-अपने विचार अवश्य व्यक्त करें। यद्यपि हमें मनुष्यों का कोई भय नहीं है, फिर भी आप विजय के उपाय पर विचार करें।' 21-22
 
‘Or a single monkey had come and caused great destruction among us. Therefore it is very difficult to understand the means of achieving the task. Therefore whoever thinks it is right according to his wisdom, he should tell that. All of you must express your views. Although we have no fear of humans, yet you must think about the means of victory. 21-22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)