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ramayan 6.12.20-21h: जैसे घोड़ा लंबी सड़क पर चलते-चलते थक जाता है, वैसे ही मैं भी काम-पीड़ा से थका हुआ अनुभव कर रहा हूँ। तथापि मुझे शत्रुओं से कोई भय नहीं है; क्योंकि वे वनवासी वानर अथवा दशरथ के वे दोनों पुत्र श्री राम और लक्ष्मण असंख्य जलचरों और मछलियों से भरे हुए उस अभेद्य समुद्र को कैसे पार कर सकेंगे?॥ 20 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  6.12.20-21h 
श्रान्तोऽहं सततं कामाद् यातो हय इवाध्वनि।
कथं सागरमक्षोभ्यं तरिष्यन्ति वनौकस:॥ २०॥
बहुसत्त्वझषाकीर्णं तौ वा दशरथात्मजौ।
 
 
अनुवाद
जैसे घोड़ा लंबी सड़क पर चलते-चलते थक जाता है, वैसे ही मैं भी काम-पीड़ा से थका हुआ अनुभव कर रहा हूँ। तथापि मुझे शत्रुओं से कोई भय नहीं है; क्योंकि वे वनवासी वानर अथवा दशरथ के वे दोनों पुत्र श्री राम और लक्ष्मण असंख्य जलचरों और मछलियों से भरे हुए उस अभेद्य समुद्र को कैसे पार कर सकेंगे?॥ 20 1/2॥
 
‘Just as a horse gets tired while walking on a long road, similarly I too am feeling tired due to the pain of sex. However, I have no fear from the enemies; because how will those forest dwelling monkeys or those two sons of Dasharath, Shri Ram and Lakshman be able to cross the impenetrable ocean filled with innumerable aquatic animals and fishes?॥ 20 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)