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ramayan 6.12.16-17h: घी की अग्नि की लपटों के समान तेजस्वी और सूर्य की किरणों के समान तेजस्वी सीता को देखकर तथा ऊँची नासिका और विशाल नेत्रों से सुशोभित उनके पवित्र और सुन्दर मुख को देखकर अब मैं अपने वश में नहीं रहा। काम मुझ पर हावी हो गया है॥16 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  6.12.16-17h 
हुताग्नेरर्चिसंकाशामेनां सौरीमिव प्रभाम्।
उन्नसं विमलं वल्गु वदनं चारुलोचनम्॥ १६॥
पश्यंस्तदवशस्तस्या: कामस्य वशमेयिवान्।
 
 
अनुवाद
घी की अग्नि की लपटों के समान तेजस्वी और सूर्य की किरणों के समान तेजस्वी सीता को देखकर तथा ऊँची नासिका और विशाल नेत्रों से सुशोभित उनके पवित्र और सुन्दर मुख को देखकर अब मैं अपने वश में नहीं रहा। काम मुझ पर हावी हो गया है॥16 1/2॥
 
Having seen Sita who is as radiant as the flames of the fire in which ghee has been offered and as radiant as the sun's rays, and having observed her pure and beautiful face adorned with a high nose and large eyes, I am no longer in my control. Desire has taken over me.॥ 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)