श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 118: मूर्तिमान् अग्निदेव का सीता को लेकर चिता से प्रकट होना और श्रीराम को समर्पित करके उनकी पवित्रता को प्रमाणित करना तथा श्रीराम का सीता को सहर्ष स्वीकार करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.118.5 
अब्रवीत् तु तदा रामं साक्षी लोकस्य पावक:।
एषा ते राम वैदेही पापमस्यां न विद्यते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस समय जगत के साक्षी अग्निदेव ने श्री राम से कहा - 'श्रीराम! यह आपकी पत्नी विदेह राजकुमारी सीता हैं। इसमें कोई पाप या दोष नहीं है।॥5॥
 
At that time Agni, the witness of the world, said to Shri Ram - 'Shri Ram! This is your wife, Videha princess Sita. There is no sin or fault in her.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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