श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 118: मूर्तिमान् अग्निदेव का सीता को लेकर चिता से प्रकट होना और श्रीराम को समर्पित करके उनकी पवित्रता को प्रमाणित करना तथा श्रीराम का सीता को सहर्ष स्वीकार करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.118.17 
प्रत्ययार्थं तु लोकानां त्रयाणां सत्यसंश्रय:।
उपेक्षे चापि वैदेहीं प्रविशन्तीं हुताशनम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तथापि तीनों लोकों के प्राणियों के मन में श्रद्धा उत्पन्न करने के लिए मैंने एकमात्र सत्य के सहारे विदेहकुमारी सीता को अग्नि में प्रवेश करने से रोकने का प्रयत्न नहीं किया ॥17॥
 
However, in order to instill faith in the minds of the beings of the three worlds, I did not try to stop Videhakumari Sita from entering the fire with the help of the only truth. 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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