श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.116.5 
किं मामसदृशं वाक्यमीदृशं श्रोत्रदारुणम्।
रूक्षं श्रावयसे वीर प्राकृत: प्राकृतामिव॥ ५॥
 
 
अनुवाद
"वीर! तुम मुझसे इतनी कठोर, अनुचित, कठोर और असभ्य बातें क्यों कह रहे हो? जैसे एक निम्न वर्ग का पुरुष निम्न वर्ग की स्त्री से ऐसी बातें कह देता है जो नहीं कहनी चाहिए, वैसे ही तुम भी मुझसे वही बातें कह रहे हो।"
 
‘Veer! Why are you saying such harsh, inappropriate, harsh and rude things to me. Just like a low class man says things that should not be said to a low class woman, you are also saying the same thing to me.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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