श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.116.4 
ततो बाष्पपरिक्लिन्नं प्रमार्जन्ती स्वमाननम्।
शनैर्गद‍्गदया वाचा भर्तारमिदमब्रवीत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वह अपने नेत्रों के आँसुओं से भीगे हुए मुख को पल्लू से पोंछती हुई धीमी और रुँधी हुई वाणी में अपने पति से इस प्रकार बोली:॥4॥
 
Wiping her face, which was wet with tears from her eyes, with her pallu, she spoke to her husband in a slow and choked voice as follows:॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)