श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.116.33 
ददृशुस्तां महाभागां प्रविशन्तीं हुताशनम्।
ऋषयो देवगन्धर्वा यज्ञे पूर्णाहुतीमिव॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों, देवताओं और गंधर्वों ने देखा कि जिस प्रकार यज्ञ में पूर्णाहुति दी जाती है, उसी प्रकार सौभाग्यवती सीता जलती हुई अग्नि में प्रवेश कर रही हैं।
 
The sages, gods and Gandharvas saw that just as a purnaahutikaa oblation is offered in a yajna, in the same manner the fortunate Sita is entering the burning fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)