श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.116.31 
सा तप्तनवहेमाभा तप्तकाञ्चनभूषणा।
पपात ज्वलनं दीप्तं सर्वलोकस्य संनिधौ॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तपाये हुए सोने के समान चमकती हुई सीता, अग्नि में तपकर शुद्ध किये हुए स्वर्ण के आभूषणों से विभूषित होकर, सबके सामने ही जलती हुई अग्नि में कूद पड़ीं॥31॥
 
Sita, who shone like freshly heated gold, was adorned with golden ornaments purified by heating in fire. She jumped into the burning fire in front of everyone, right in front of them.॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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