श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.116.29 
एवमुक्त्वा तु वैदेही परिक्रम्य हुताशनम्।
विवेश ज्वलनं दीप्तं नि:शङ्केनान्तरात्मना॥ २९॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर विदेहराजकुमारी ने अग्निदेव की परिक्रमा की और मुक्त मन से जलती हुई अग्नि में लीन हो गईं ॥29॥
 
Saying this, Videharajkumari revolved around Agnidev and with a free mind, she got absorbed in the burning fire. 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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