श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.116.28 
आदित्यो भगवान् वायुर्दिशश्चन्द्रस्तथैव च।
अहश्चापि तथा संध्ये रात्रिश्च पृथिवी तथा।
यथान्येऽपि विजानन्ति तथा चारित्रसंयुताम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
यदि भगवान सूर्य, वायु, दिशाएँ, चन्द्रमा, दिन, रात्रि, दोनों संध्याएँ, देवी पृथ्वी और अन्य देवता भी यह जानते हैं कि मैं शुद्ध स्वभाव वाला हूँ, तो भगवान अग्निदेव सब ओर से मेरी रक्षा करें।॥28॥
 
If Lord Sun, wind, directions, moon, day, night, both evenings, goddess Earth and other gods also know that I am of pure character, then Lord Agni should protect me from all sides.'॥ 28॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd