श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.116.27 
कर्मणा मनसा वाचा यथा नातिचराम्यहम्।
राघवं सर्वधर्मज्ञं तथा मां पातु पावक:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
यदि मैंने मन, वचन और कर्म से समस्त धर्मों के ज्ञाता श्री रघुनाथजी की आज्ञा का उल्लंघन नहीं किया है, तो अग्निदेव मेरी रक्षा करें॥ 27॥
 
If I have not transgressed the authority of Sri Raghunatha, the knower of all religions, by my thoughts, words and actions, then may Agnidev protect me.'॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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