श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.116.26 
यथा मां शुद्धचारित्रां दुष्टां जानाति राघव:।
तथा लोकस्य साक्षी मां सर्वत: पातु पावक:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
मेरा चरित्र तो शुद्ध है, फिर भी श्री रघुनाथजी मुझे भ्रष्ट समझते हैं। यदि मैं सर्वथा निष्कलंक हूँ, तो सम्पूर्ण जगत के साक्षी अग्निदेव सब ओर से मेरी रक्षा करेंगे॥ 26॥
 
‘My character is pure, yet Shri Raghunathji thinks that I am corrupt. If I am completely spotless, then Agnidev, the witness of the entire universe, will protect me from all sides.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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