श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.116.19 
अप्रीतेन गुणैर्भर्त्रा त्यक्ताया जनसंसदि।
या क्षमा मे गतिर्गन्तुं प्रवेक्ष्ये हव्यवाहनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
मेरे स्वामी मेरे गुणों से प्रसन्न नहीं हैं। उन्होंने सबके सामने मुझे त्याग दिया है। ऐसी स्थिति में मैं अपने लिए उचित मार्ग पर चलने के लिए अग्नि में प्रवेश करूँगा।॥19॥
 
My master is not pleased with my qualities. He has abandoned me in the presence of everyone. In such a situation, I will enter the fire to go on the right path for me.'॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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