श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.116.14 
त्वया तु नृपशार्दूल रोषमेवानुवर्तता।
लघुनेव मनुष्येण स्त्रीत्वमेव पुरस्कृतम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! तुमने नीच पुरुष की भाँति केवल क्रोध का ही अनुसरण किया है, मेरे स्वभाव और चरित्र की उपेक्षा की है, तथा नीच कुल की स्त्रियों के स्वभाव को ही अपने सामने रखा है॥ 14॥
 
O King! Like a mean man you have followed only anger and have ignored my character and nature and have kept only the nature of low class women before you.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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