श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.116.13 
न वृथा ते श्रमोऽयं स्यात् संशये न्यस्य जीवितम्।
सुहृज्जनपरिक्लेशो न चायं विफलस्तव॥ १३॥
 
 
अनुवाद
फिर इस प्रकार प्राण संकट में डालकर तुम्हें युद्ध आदि व्यर्थ परिश्रम नहीं करना पड़ेगा और तुम्हारे मित्रों को भी व्यर्थ कष्ट नहीं उठाना पड़ेगा॥13॥
 
Then by putting your life in danger in this way you would not have to do the futile labour of fighting a war etc. and your friends would also not have to suffer unnecessarily.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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