श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.116.11 
प्रेषितस्ते महावीरो हनुमानवलोकक:।
लङ्कास्थाहं त्वया राजन् किं तदा न विसर्जिता॥ ११॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब आपने महावीर हनुमान को लंका में मुझसे मिलने भेजा था, तब आपने मुझे उसी समय क्यों नहीं त्याग दिया?॥11॥
 
Maharaj! When you sent Mahavir Hanuman to see me in Lanka, why did you not abandon me at that time itself?॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)