श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.116.1 
एवमुक्ता तु वैदेही परुषं रोमहर्षणम्।
राघवेण सरोषेण श्रुत्वा प्रव्यथिताभवत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब श्री रघुनाथजी ने क्रोध में आकर रोंगटे खड़े कर देने वाले ऐसे कठोर वचन कहे, तब विदेह राजकुमारी सीता उन्हें सुनकर बहुत दुःखी हुईं॥1॥
 
When Sri Raghunatha spoke such harsh words in anger and made one's hair stand on end, Videha princess Sita felt very sad on hearing them.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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