Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.115.5: जब आप आश्रम में अकेले थे, तब उस चंचलचित्त राक्षस ने आपका हरण कर लिया था। यह दोष मुझ पर दैवीय कृपा से लगा था, जिसे मैंने मानव-प्रयत्न से दूर कर दिया है॥5॥ | ramayan सर्ग 6.115: सीता के चरित्र पर संदेह करके श्रीराम का उन्हें ग्रहण करने से इनकार करना और अन्यत्र जाने के लिये कहना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब आप आश्रम में अकेले थे, तब उस चंचलचित्त राक्षस ने आपका हरण कर लिया था। यह दोष मुझ पर दैवीय कृपा से लगा था, जिसे मैंने मानव-प्रयत्न से दूर कर दिया है॥5॥
When you were alone in the hermitage, that fickle-minded demon abducted you. This flaw was inflicted on me by divine intervention, which I removed by human effort.॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥