Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.115.17: तुम्हारे चरित्र पर संदेह करने का कारण तो है, फिर भी तुम मेरे सामने खड़े हो। जैसे नेत्ररोग से पीड़ित व्यक्ति को दीपक का प्रकाश अच्छा नहीं लगता, वैसे ही आज तुम मुझे अत्यंत अप्रिय लग रहे हो॥ 17॥ | ramayan सर्ग 6.115: सीता के चरित्र पर संदेह करके श्रीराम का उन्हें ग्रहण करने से इनकार करना और अन्यत्र जाने के लिये कहना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्राप्तचारित्रसंदेहा मम प्रतिमुखे स्थिता।
दीपो नेत्रातुरस्येव प्रतिकूलासि मे दृढा॥ १७॥
अनुवाद
तुम्हारे चरित्र पर संदेह करने का कारण तो है, फिर भी तुम मेरे सामने खड़े हो। जैसे नेत्ररोग से पीड़ित व्यक्ति को दीपक का प्रकाश अच्छा नहीं लगता, वैसे ही आज तुम मुझे अत्यंत अप्रिय लग रहे हो॥ 17॥
‘There is a reason to doubt your character; still you are standing in front of me. Just like a person suffering from eye diseases does not like the light of a lamp, similarly today you seem very unpleasant to me.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥