Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.115.13: अपने अपमान का बदला लेना मनुष्य का जो कर्तव्य है, उसे मैंने अपने सम्मान की रक्षा की इच्छा से रावण को मारकर पूरा किया॥13॥   |   ramayan सर्ग 6.115: सीता के चरित्र पर संदेह करके श्रीराम का उन्हें ग्रहण करने से इनकार करना और अन्यत्र जाने के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 115: सीता के चरित्र पर संदेह करके श्रीराम का उन्हें ग्रहण करने से इनकार करना और अन्यत्र जाने के लिये कहना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.115.13 
यत् कर्तव्यं मनुष्येण धर्षणां प्रतिमार्जता।
तत् कृतं रावणं हत्वा मयेदं मानकांक्षिणा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
अपने अपमान का बदला लेना मनुष्य का जो कर्तव्य है, उसे मैंने अपने सम्मान की रक्षा की इच्छा से रावण को मारकर पूरा किया॥13॥
 
The duty of a man to avenge his disrespect, I accomplished that by killing Ravana with the desire to protect my honour.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)