श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 115: सीता के चरित्र पर संदेह करके श्रीराम का उन्हें ग्रहण करने से इनकार करना और अन्यत्र जाने के लिये कहना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.115.12 
सीतामुत्पलपत्राक्षीं नीलकुञ्चितमूर्धजाम्।
अवदद् वै वरारोहां मध्ये वानररक्षसाम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वह पुनः वानरों और राक्षसों के सामने काले घुंघराले केशों और कमल-नेत्रों वाली सुन्दरी सीता से कहने लगा-॥12॥
 
He once again began to speak to Sita, the beautiful lady with black curly hair and lotus-eyed face, in the presence of monkeys and demons -॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)