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ramayan 6.115.10: श्री रामजी की यह बात सुनकर सीताजी की हिरणी के समान आँखें आँसुओं से भर आईं॥10॥   |   ramayan सर्ग 6.115: सीता के चरित्र पर संदेह करके श्रीराम का उन्हें ग्रहण करने से इनकार करना और अन्यत्र जाने के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.115.10 
इत्येवं वदत: श्रुत्वा सीता रामस्य तद् वच:।
मृगीवोत्फुल्लनयना बभूवाश्रुपरिप्लुता॥ १०॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी की यह बात सुनकर सीताजी की हिरणी के समान आँखें आँसुओं से भर आईं॥10॥
 
Hearing Sri Rama say this, Sita's eyes, which had eyes like those of a deer, were filled with tears. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)