श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 115: सीता के चरित्र पर संदेह करके श्रीराम का उन्हें ग्रहण करने से इनकार करना और अन्यत्र जाने के लिये कहना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.115.1 
तां तु पार्श्वे स्थितां प्रह्वां राम: सम्प्रेक्ष्य मैथिलीम्।
हृदयान्तर्गतं भावं व्याहर्तुमुपचक्रमे॥ १॥
 
 
अनुवाद
मिथिला की पुत्री सीता को अपने निकट विनीत भाव से खड़ी देखकर श्री रामजी अपना हार्दिक अभिप्राय प्रकट करने लगे- ॥1॥
 
Seeing Mithila's daughter Sita standing humbly near him, Sri Rama began to express his heartfelt intention - ॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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