श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 114: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण का सीता को उनके समीप लाना और सीता का प्रियतम के मुखचन्द्र का दर्शन करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.114.7 
दिव्याङ्गरागां वैदेहीं दिव्याभरणभूषिताम्।
इह सीतां शिर:स्नातामुपस्थापय मा चिरम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
विदेहनन्दिनी सीता को सिर से स्नान कराकर तथा दिव्य सुगन्धि और आभूषणों से विभूषित करके शीघ्र ही मेरे पास ले आओ।’ ॥7॥
 
After bathing Videhanandini Sita from the head and adorning her with divine perfume and ornaments, bring her to me quickly.' ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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