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श्लोक 6.114.7  |
दिव्याङ्गरागां वैदेहीं दिव्याभरणभूषिताम्।
इह सीतां शिर:स्नातामुपस्थापय मा चिरम्॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| विदेहनन्दिनी सीता को सिर से स्नान कराकर तथा दिव्य सुगन्धि और आभूषणों से विभूषित करके शीघ्र ही मेरे पास ले आओ।’ ॥7॥ |
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| After bathing Videhanandini Sita from the head and adorning her with divine perfume and ornaments, bring her to me quickly.' ॥ 7॥ |
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