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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 114: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण का सीता को उनके समीप लाना और सीता का प्रियतम के मुखचन्द्र का दर्शन करना
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श्लोक 32
श्लोक
6.114.32
ततो लक्ष्मणसुग्रीवौ हनूमांश्च प्लवङ्गम:।
निशम्य वाक्यं रामस्य बभूवुर्व्यथिता भृशम्॥ ३२॥
अनुवाद
उस समय श्री रामचन्द्रजी के उपर्युक्त वचन सुनकर लक्ष्मण, सुग्रीव और कपिवर हनुमान तीनों अत्यंत व्याकुल हो गए॥32॥
At that time, after hearing the above words of Shri Ramchandraji, all three Lakshman, Sugriva and Kapivar Hanuman became extremely distressed. 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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