श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 114: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण का सीता को उनके समीप लाना और सीता का प्रियतम के मुखचन्द्र का दर्शन करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.114.31 
एवमुक्तस्तु रामेण सविमर्शो विभीषण:।
रामस्योपानयत् सीतां संनिकर्षं विनीतवत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
श्री राम की यह बात सुनकर विभीषण गहन विचार में पड़ गए और विनम्रतापूर्वक सीता को अपने पास ले आए।
 
On hearing Sri Rama say this, Vibhishana went into deep thought and humbly brought Sita near him.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas