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श्लोक 6.114.30  |
विसृज्य शिबिकां तस्मात् पद्भॺामेवापसर्पतु।
समीपे मम वैदेहीं पश्यन्त्वेते वनौकस:॥ ३०॥ |
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| अनुवाद |
| 'इसलिए जानकी को पालकी छोड़कर पैदल मेरे पास आना चाहिए और ये सभी बंदर उन्हें देखें।' |
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| ‘Therefore Janaki should leave the palanquin and come to me on foot and all these monkeys should see her.’ |
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