श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 114: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण का सीता को उनके समीप लाना और सीता का प्रियतम के मुखचन्द्र का दर्शन करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.114.3 
सा हि शोकसमाविष्टा बाष्पपर्याकुलेक्षणा।
मैथिली विजयं श्रुत्वा द्रष्टुं त्वामभिकांक्षति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वह शोक में डूबी हुई है। उसकी आँखें आँसुओं से भरी हुई हैं। आपकी विजय का समाचार सुनकर मिथिलेशकुमारी आपसे मिलना चाहती है॥3॥
 
‘She is immersed in grief. Her eyes are filled with tears. Hearing the news of your victory, Mithilesh Kumari wants to see you.॥ 3॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas