श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 114: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण का सीता को उनके समीप लाना और सीता का प्रियतम के मुखचन्द्र का दर्शन करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.114.29 
सैषा विपद‍्गता चैव कृच्छ्रेण च समन्विता।
दर्शने नास्ति दोषोऽस्या मत्समीपे विशेषत:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
यह सीता इस समय संकट में है। वह मानसिक रूप से व्याकुल है और विशेष रूप से मेरे पास है; इसलिए उसका बिना परदे के सबके सामने आना अनुचित नहीं है॥29॥
 
‘This Sita is in trouble at this time. She is mentally distressed and is especially with me; therefore it is not wrong for her to come in front of everyone without a veil.॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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