श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 114: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण का सीता को उनके समीप लाना और सीता का प्रियतम के मुखचन्द्र का दर्शन करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.114.25 
संरम्भाच्चाब्रवीद् रामश्चक्षुषा प्रदहन्निव।
विभीषणं महाप्राज्ञं सोपालम्भमिदं वच:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उस समय श्री राम उन सैनिकों को ऐसे क्रोधित दृष्टि से देख रहे थे, मानो उन्हें जलाकर भस्म कर देंगे। उन्होंने क्रोधपूर्वक परम बुद्धिमान विभीषण को डाँटकर कहा-॥25॥
 
At that time Shri Ram was looking at the soldiers who were removing the soldiers with such an angry look as if he would burn them to ashes. He angrily rebuked the most intelligent Vibhishan and said -॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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