श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 114: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण का सीता को उनके समीप लाना और सीता का प्रियतम के मुखचन्द्र का दर्शन करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.114.2 
यन्निमित्तोऽयमारम्भ: कर्मणां य: फलोदय:।
तां देवीं शोकसंतप्तां द्रष्टुमर्हसि मैथिलीम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मिथिला की शोकाकुल पुत्री सीतादेवी को दर्शन दीजिए, जिनके लिए युद्ध आदि सब कार्य प्रारम्भ किए गए थे॥ 2॥
 
O Lord! Please give darshan to the grief-stricken daughter of Mithila, Sita Devi, for whom all these activities like war etc. were initiated.॥ 2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas